कैसे मछुआरों और मोतियों के व्यापार से शुरू हुई कहानी, तेल, हवाई अड्डों और टूरिज़्म के ज़रिये आज के डेज़र्ट सफारी तक पहुँची – यही इस सेक्शन का धागा है।

सोचिए अगर दुबई से सभी सड़कें, मॉल और काँच की इमारतें हटा दी जाएँ, तो क्या बचेगा? रेत के छोटे-बड़े टीले, कभी-कभार झाड़ी या पेड़, और दूर-दूर तक फैला आसमान। बाहरी व्यक्ति को यह खाली सा दिख सकता है, लेकिन कई पीढ़ियों से यहाँ रहने वाले लोगों के लिए यही उनका नक्शा, घर और आजीविका था।
हर टीले की दिशा, ऊँचाई और रेत का रंग अनुभवी नज़र के लिए संकेत थे – किस ओर क़ाफ़िले का पुराना रास्ता जाता है, किस तरफ़ पानी या छाया मिल सकती है। दिशाएँ पढ़ने के लिए लोग सितारों, हवा की दिशा और जानवरों के व्यवहार को ध्यान से देखते थे; ये ज्ञान किताबों से नहीं, अनुभव और कहानियों से एक पीढ़ी से दूसरी तक जाता रहा।

बेदूइन क़बीले मौसम और चारागाह के हिसाब से तंबू और सामान समेटकर एक जगह से दूसरी जगह जाते थे। इस जीवन में ऊँट सबसे अहम साथी था – वही सामान ढोता, लोगों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाता और कई बार दूध, माँस और चमड़े के रूप में भोजन और संसाधन भी देता।
रात को जब हवा ठंडी होने लगती और आसमान साफ़ हो जाता, तो परिजन आग के चारों तरफ़ बैठते, कॉफी या चाय बनती और बीते सफ़र की बातें या पुरानी दास्तानें सुनाई जातीं। आप आज जब किसी रेगिस्तानी कैंप में बैठकर मेज़बानों की मेहमाननवाज़ी महसूस करते हैं, तो दरअसल उसी परंपरा की एक हल्की सी गूंज सुन रहे होते हैं।

तेल की खोज से पहले खाड़ी के कई छोटे शहरों की तरह, यहाँ की अर्थव्यवस्था भी मछली पकड़ने, मोती निकालने और सीमित समुद्री व्यापार पर टिकी हुई थी। गोताखोर महीनों तक समुद्र में रहकर ऐसे शैवाल और घोंघे तलाशते जिनमें कीमती मोती हो सकते थे।
जब कल्चर्ड पर्ल यानी कृत्रिम मोतियों ने बाज़ार में जगह बना ली और वैश्विक व्यापार के रास्ते बदले, तो पुराने तरीक़े से कमाई मुश्किल होती चली गई। इसके बाद तेल के कुएँ, बंदरगाह, एयरपोर्ट और व्यापारिक इंफ़्रास्ट्रक्चर आए, और दुबई तेज़ी से दुनिया से जुड़ती नगरी बन गई। रेगिस्तान अब सिर्फ़ कठोर ज़मीन नहीं रहा, बल्कि संरक्षित की जाने वाली प्राकृतिक धरोहर और अनुभव बेचने वाली नई ‘डेस्टिनेशन’ बनता गया।

जब 4×4 गाड़ियाँ आम होने लगीं, तो बहुत-से स्थानीय लोग वीकेंड पर दोस्तों और परिवार के साथ रेगिस्तान की ओर निकल जाते थे। कहीं थोड़ा सा पिकनिक, कहीं कुछ हल्की ऑफ-रोड ड्राइव, और रात होने से पहले वापस शहर – कोई तय पैकेज नहीं, बस आसान सा आउटिंग।
धीरे-धीरे जैसे दुबई अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का पसंदीदा ठिकाना बनता गया, ज़रूरत महसूस हुई कि यही अनौपचारिक सफ़र एक सुरक्षित और व्यवस्थित टूर के रूप में पेश किए जाएँ। क़ाबिल ड्राइवरों और टूर कंपनियों ने मिलकर तय रूट, सेफ़्टी रूल्स और कैंप सेटअप तैयार किए, और समय के साथ वही आज के डेज़र्ट सफारी पैकेजों का रूप ले चुका है।

आज के कैंप बेदूइन तंबुओं से प्रेरित हैं लेकिन आधुनिक सुविधा के साथ। ज़मीन पर बिछी रंग-बिरंगी दरी, गोलाई में लगे कुशन, सॉफ्ट लाइट्स और कभी-कभी बीच में या साइड में छोटा-सा स्टेज – ये सब मिलकर ऐसा माहौल बनाते हैं जहाँ आप आराम से बैठकर खाना खा सकें, बातें कर सकें और शो देख सकें।
बुफे काउंटर पर अरबी और अंतरराष्ट्रीय व्यंजनों का मिक्स देखने को मिलता है – चावल, ग्रिल्ड मीट, सलाद, डेज़र्ट, साथ में सॉफ्ट ड्रिंक्स और अक्सर चाय-कॉफी। बीच-बीच में होने वाले डांस या म्यूज़िक शोज़ कई आगंतुकों के लिए पहली बार का ऐसा अनुभव होते हैं जहाँ वे किसी और संस्कृति को उसकी अपनी ज़मीन पर महसूस करते हैं।

रेत पर चलना साधारण सड़क पर चलने जैसा नहीं होता – गाड़ी थोड़ी फिसलती, हल्की-सी सरकती लगती है, और यही उसे रोमांचक बनाता है। अच्छे ड्राइवर के लिए ये फिसलन किसी खतरे की बजाय एक भाषा होती है, जिसे वह पढ़कर यह तय करता है कि कहाँ तेज़ जाना है और कहाँ धीरे।
क्वाड और बग्गी राइड उन लोगों के लिए हैं जो अपनी ड्राइविंग से रेगिस्तान को महसूस करना चाहते हैं, जबकि सैंडबोर्ड पर टीले से नीचे फिसलना बच्चों और बड़ों – दोनों के लिए आसान और हँसी-ठिठोली से भरा अनुभव बन सकता है। कई लोगों के लिए यह सफारी का सबसे ‘इंस्टाग्राम-फ्रेंडली’ हिस्सा होता है।

रेगिस्तान बंजर ज़रूर दिखता है, पर पूरी तरह खाली नहीं। दुबई के आसपास के क्षेत्रों में अरबी ओरिक्स, अलग-अलग प्रजाति की गज़ेल, रेगिस्तानी लोमड़ी और कई प्रवासी पक्षी पाए जाते हैं, जिन्होंने कम पानी, तेज़ धूप और तापमान में बड़े उतार-चढ़ाव के साथ जीना सीख लिया है।
इन नाज़ुक इकोसिस्टम को बचाने के लिए कुछ इलाकों को संरक्षण क्षेत्र घोषित किया गया है, जहाँ गाड़ियों की संख्या और रूट पर नियंत्रण रहता है। कुछ टूर खास तौर पर यही दिखाने पर ज़ोर देते हैं कि रेगिस्तान केवल “एडवेंचर पार्क” नहीं, बल्कि जीव-जंतुओं का घर भी है, जिसका सम्मान करना ज़रूरी है।

आदर्श डेज़र्ट सफारी वह है जिसमें आप मस्ती भी करें और हर पल सुरक्षित भी महसूस करें। इसके लिए टूर कंपनी और यात्री – दोनों को अपनी-अपनी ज़िम्मेदारी निभानी होती है। कंपनी समय पर वाहन की सर्विसिंग, ड्राइवरों की ट्रेनिंग और मौसम की मॉनिटरिंग करती है; यात्री सीट बेल्ट पहनें, गाइड की बातें ध्यान से सुनें और अनावश्यक जोखिम न लें – इतना करना ही काफी है।
साथ ही, रेगिस्तान एक साझा जगह है – आपके अलावा कई और लोग भी उसी शाम वही अनुभव जी रहे होते हैं। बहुत ज़ोर-ज़ोर से शोर मचाने, कूड़ा फेंकने, दूर तक अकेले निकल जाने या किसी की निजी तस्वीरें बिना इजाज़त लेने से बचना, छोटे लेकिन महत्त्वपूर्ण कदम हैं जो पूरी शाम का माहौल सुखद बनाते हैं।

कई सफारी Lahbab क्षेत्र में जाती हैं, जहाँ की रेत लालिमा लिए होती है और टीलों की ढलानें ज़्यादा नुकीली हैं – फोटो और वीडियो के लिए बेहद आकर्षक। कुछ अन्य पैकेज Al Marmoom के आसपास के इलाकों में जाते हैं, जहाँ भू-आकृति अपेक्षाकृत नरम है और वन्यजीव देखने की संभावना थोड़ी ज़्यादा होती है।
उच्च-स्तरीय या छोटे समूह वाले टूर अक्सर अधिक शांत, भीतर के संरक्षण क्षेत्रों तक पहुँचते हैं, जबकि बड़े, किफ़ायती पैकेज शहर के अपेक्षाकृत नज़दीकी और आसानी से पहुँचने योग्य हिस्सों को प्राथमिकता देते हैं। आपकी पसंद – शानदार नज़ारे, सुकून भरी ख़ामोशी या कम ड्राइव टाइम – यह तय करेगी कि आपके लिए कौन-सा रूट सही है।

जब आप इंटरनेट पर ‘Desert Safari Dubai’ सर्च करते हैं, तो दर्जनों लिंक सामने आ जाते हैं और सब पहली नज़र में लगभग एक जैसे लग सकते हैं। पर अगर आप थोड़ा गहराई से देखें, तो रिव्यू, फोटो और पैकेज की बारीकियाँ कई फर्क साफ़ कर देती हैं।
हमेशा नवीनतम रिव्यू पढ़ें, जहाँ लोग संगठन, सुरक्षा, ड्राइवर के व्यवहार, खाना और रिफंड/कैंसिलेशन के बारे में लिखते हैं। देखें कि एक गाड़ी में कितने लोग बैठते हैं, क्या कोई हिडन चार्ज का ज़िक्र है, और क्या कंपनी अपनी शर्तें साफ़-साफ़ बताती है या नहीं।

जैसे-जैसे डेज़र्ट सफारी की लोकप्रियता बढ़ी है, वैसे-वैसे यह सवाल भी ज़्यादा पूछा जाने लगा है कि कैसे हम इस अनुभव को ज़िम्मेदारी के साथ जियें। कई ऑपरेटर अब प्लास्टिक के उपयोग को घटाने, लाइट और तेज़ संगीत को सीमित रखने और मेहमानों को स्थानीय पर्यावरण और संस्कृति के बारे में बताने पर ध्यान दे रहे हैं।
दूसरी ओर, आज के यात्री भी सिर्फ़ ‘एक फोटो’ से ज़्यादा चाहते हैं – वे कहानी, संदर्भ और इंसानी जुड़ाव ढूँढते हैं। जब टूर कंपनी और यात्री दोनों इस दिशा में सोचते हैं, तो डेज़र्ट सफारी दुबई सिर्फ़ एक चेकलिस्ट-ऐक्टिविटी न रहकर एक गहरी याद बन सकती है।

डे-ट्रिप सफारी से भी आपको रेगिस्तान का अच्छा अनुभव मिल सकता है, लेकिन अगर आप रात वहीं ठहरने वाले ओवरनाइट पैकेज चुनते हैं, तो मामला और भी रोचक हो जाता है। जब दिन वाले टूर की बसें वापस चली जाती हैं, तो कैंप थोड़ा-थोड़ा शांत होता जाता है और अँधेरे के साथ सितारों की संख्या बढ़ने लगती है।
रेत पर बिछे बिस्तर या टेंट के अंदर लेटकर जब आप ऊपर देखते हैं, तो शहर में शायद ही कभी दिखने वाला साफ़ आसमान नज़र आता है। सुबह जब पहली किरणें टीलों के पीछे से झाँकती हैं और आपके हाथ में गर्म चाय या कॉफी का कप होता है, तो वो कुछ ही मिनट अक्सर पूरी सफारी के सबसे यादगार पल बन जाते हैं।

आज हम दुबई को ग्लोबल सिटी के रूप में देखते हैं – गगनचुंबी इमारतें, शॉपिंग मॉल, आर्टिफिशियल आइलैंड – लेकिन इसकी जड़ें उस रेगिस्तान में हैं जहाँ कभी काफ़िले रुकते, लोग एक-दूसरे के साथ पानी और भोजन साझा करते और मेहमान को अल्लाह की भेजी नेमत मानकर उसका स्वागत करते थे।
जब आप डेज़र्ट सफारी के लिए ज़िम्मेदार ऑपरेटर चुनते हैं, प्रकृति को नुकसान पहुँचाने वाले कामों से बचते हैं और वहाँ काम करने वाले लोगों के साथ सम्मान से पेश आते हैं, तो आप भी इस लंबी कहानी में अपना छोटा-सा सकारात्मक अध्याय जोड़ते हैं – और यही किसी भी अच्छी यात्रा की असली खूबसूरती है।

सोचिए अगर दुबई से सभी सड़कें, मॉल और काँच की इमारतें हटा दी जाएँ, तो क्या बचेगा? रेत के छोटे-बड़े टीले, कभी-कभार झाड़ी या पेड़, और दूर-दूर तक फैला आसमान। बाहरी व्यक्ति को यह खाली सा दिख सकता है, लेकिन कई पीढ़ियों से यहाँ रहने वाले लोगों के लिए यही उनका नक्शा, घर और आजीविका था।
हर टीले की दिशा, ऊँचाई और रेत का रंग अनुभवी नज़र के लिए संकेत थे – किस ओर क़ाफ़िले का पुराना रास्ता जाता है, किस तरफ़ पानी या छाया मिल सकती है। दिशाएँ पढ़ने के लिए लोग सितारों, हवा की दिशा और जानवरों के व्यवहार को ध्यान से देखते थे; ये ज्ञान किताबों से नहीं, अनुभव और कहानियों से एक पीढ़ी से दूसरी तक जाता रहा।

बेदूइन क़बीले मौसम और चारागाह के हिसाब से तंबू और सामान समेटकर एक जगह से दूसरी जगह जाते थे। इस जीवन में ऊँट सबसे अहम साथी था – वही सामान ढोता, लोगों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाता और कई बार दूध, माँस और चमड़े के रूप में भोजन और संसाधन भी देता।
रात को जब हवा ठंडी होने लगती और आसमान साफ़ हो जाता, तो परिजन आग के चारों तरफ़ बैठते, कॉफी या चाय बनती और बीते सफ़र की बातें या पुरानी दास्तानें सुनाई जातीं। आप आज जब किसी रेगिस्तानी कैंप में बैठकर मेज़बानों की मेहमाननवाज़ी महसूस करते हैं, तो दरअसल उसी परंपरा की एक हल्की सी गूंज सुन रहे होते हैं।

तेल की खोज से पहले खाड़ी के कई छोटे शहरों की तरह, यहाँ की अर्थव्यवस्था भी मछली पकड़ने, मोती निकालने और सीमित समुद्री व्यापार पर टिकी हुई थी। गोताखोर महीनों तक समुद्र में रहकर ऐसे शैवाल और घोंघे तलाशते जिनमें कीमती मोती हो सकते थे।
जब कल्चर्ड पर्ल यानी कृत्रिम मोतियों ने बाज़ार में जगह बना ली और वैश्विक व्यापार के रास्ते बदले, तो पुराने तरीक़े से कमाई मुश्किल होती चली गई। इसके बाद तेल के कुएँ, बंदरगाह, एयरपोर्ट और व्यापारिक इंफ़्रास्ट्रक्चर आए, और दुबई तेज़ी से दुनिया से जुड़ती नगरी बन गई। रेगिस्तान अब सिर्फ़ कठोर ज़मीन नहीं रहा, बल्कि संरक्षित की जाने वाली प्राकृतिक धरोहर और अनुभव बेचने वाली नई ‘डेस्टिनेशन’ बनता गया।

जब 4×4 गाड़ियाँ आम होने लगीं, तो बहुत-से स्थानीय लोग वीकेंड पर दोस्तों और परिवार के साथ रेगिस्तान की ओर निकल जाते थे। कहीं थोड़ा सा पिकनिक, कहीं कुछ हल्की ऑफ-रोड ड्राइव, और रात होने से पहले वापस शहर – कोई तय पैकेज नहीं, बस आसान सा आउटिंग।
धीरे-धीरे जैसे दुबई अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का पसंदीदा ठिकाना बनता गया, ज़रूरत महसूस हुई कि यही अनौपचारिक सफ़र एक सुरक्षित और व्यवस्थित टूर के रूप में पेश किए जाएँ। क़ाबिल ड्राइवरों और टूर कंपनियों ने मिलकर तय रूट, सेफ़्टी रूल्स और कैंप सेटअप तैयार किए, और समय के साथ वही आज के डेज़र्ट सफारी पैकेजों का रूप ले चुका है।

आज के कैंप बेदूइन तंबुओं से प्रेरित हैं लेकिन आधुनिक सुविधा के साथ। ज़मीन पर बिछी रंग-बिरंगी दरी, गोलाई में लगे कुशन, सॉफ्ट लाइट्स और कभी-कभी बीच में या साइड में छोटा-सा स्टेज – ये सब मिलकर ऐसा माहौल बनाते हैं जहाँ आप आराम से बैठकर खाना खा सकें, बातें कर सकें और शो देख सकें।
बुफे काउंटर पर अरबी और अंतरराष्ट्रीय व्यंजनों का मिक्स देखने को मिलता है – चावल, ग्रिल्ड मीट, सलाद, डेज़र्ट, साथ में सॉफ्ट ड्रिंक्स और अक्सर चाय-कॉफी। बीच-बीच में होने वाले डांस या म्यूज़िक शोज़ कई आगंतुकों के लिए पहली बार का ऐसा अनुभव होते हैं जहाँ वे किसी और संस्कृति को उसकी अपनी ज़मीन पर महसूस करते हैं।

रेत पर चलना साधारण सड़क पर चलने जैसा नहीं होता – गाड़ी थोड़ी फिसलती, हल्की-सी सरकती लगती है, और यही उसे रोमांचक बनाता है। अच्छे ड्राइवर के लिए ये फिसलन किसी खतरे की बजाय एक भाषा होती है, जिसे वह पढ़कर यह तय करता है कि कहाँ तेज़ जाना है और कहाँ धीरे।
क्वाड और बग्गी राइड उन लोगों के लिए हैं जो अपनी ड्राइविंग से रेगिस्तान को महसूस करना चाहते हैं, जबकि सैंडबोर्ड पर टीले से नीचे फिसलना बच्चों और बड़ों – दोनों के लिए आसान और हँसी-ठिठोली से भरा अनुभव बन सकता है। कई लोगों के लिए यह सफारी का सबसे ‘इंस्टाग्राम-फ्रेंडली’ हिस्सा होता है।

रेगिस्तान बंजर ज़रूर दिखता है, पर पूरी तरह खाली नहीं। दुबई के आसपास के क्षेत्रों में अरबी ओरिक्स, अलग-अलग प्रजाति की गज़ेल, रेगिस्तानी लोमड़ी और कई प्रवासी पक्षी पाए जाते हैं, जिन्होंने कम पानी, तेज़ धूप और तापमान में बड़े उतार-चढ़ाव के साथ जीना सीख लिया है।
इन नाज़ुक इकोसिस्टम को बचाने के लिए कुछ इलाकों को संरक्षण क्षेत्र घोषित किया गया है, जहाँ गाड़ियों की संख्या और रूट पर नियंत्रण रहता है। कुछ टूर खास तौर पर यही दिखाने पर ज़ोर देते हैं कि रेगिस्तान केवल “एडवेंचर पार्क” नहीं, बल्कि जीव-जंतुओं का घर भी है, जिसका सम्मान करना ज़रूरी है।

आदर्श डेज़र्ट सफारी वह है जिसमें आप मस्ती भी करें और हर पल सुरक्षित भी महसूस करें। इसके लिए टूर कंपनी और यात्री – दोनों को अपनी-अपनी ज़िम्मेदारी निभानी होती है। कंपनी समय पर वाहन की सर्विसिंग, ड्राइवरों की ट्रेनिंग और मौसम की मॉनिटरिंग करती है; यात्री सीट बेल्ट पहनें, गाइड की बातें ध्यान से सुनें और अनावश्यक जोखिम न लें – इतना करना ही काफी है।
साथ ही, रेगिस्तान एक साझा जगह है – आपके अलावा कई और लोग भी उसी शाम वही अनुभव जी रहे होते हैं। बहुत ज़ोर-ज़ोर से शोर मचाने, कूड़ा फेंकने, दूर तक अकेले निकल जाने या किसी की निजी तस्वीरें बिना इजाज़त लेने से बचना, छोटे लेकिन महत्त्वपूर्ण कदम हैं जो पूरी शाम का माहौल सुखद बनाते हैं।

कई सफारी Lahbab क्षेत्र में जाती हैं, जहाँ की रेत लालिमा लिए होती है और टीलों की ढलानें ज़्यादा नुकीली हैं – फोटो और वीडियो के लिए बेहद आकर्षक। कुछ अन्य पैकेज Al Marmoom के आसपास के इलाकों में जाते हैं, जहाँ भू-आकृति अपेक्षाकृत नरम है और वन्यजीव देखने की संभावना थोड़ी ज़्यादा होती है।
उच्च-स्तरीय या छोटे समूह वाले टूर अक्सर अधिक शांत, भीतर के संरक्षण क्षेत्रों तक पहुँचते हैं, जबकि बड़े, किफ़ायती पैकेज शहर के अपेक्षाकृत नज़दीकी और आसानी से पहुँचने योग्य हिस्सों को प्राथमिकता देते हैं। आपकी पसंद – शानदार नज़ारे, सुकून भरी ख़ामोशी या कम ड्राइव टाइम – यह तय करेगी कि आपके लिए कौन-सा रूट सही है।

जब आप इंटरनेट पर ‘Desert Safari Dubai’ सर्च करते हैं, तो दर्जनों लिंक सामने आ जाते हैं और सब पहली नज़र में लगभग एक जैसे लग सकते हैं। पर अगर आप थोड़ा गहराई से देखें, तो रिव्यू, फोटो और पैकेज की बारीकियाँ कई फर्क साफ़ कर देती हैं।
हमेशा नवीनतम रिव्यू पढ़ें, जहाँ लोग संगठन, सुरक्षा, ड्राइवर के व्यवहार, खाना और रिफंड/कैंसिलेशन के बारे में लिखते हैं। देखें कि एक गाड़ी में कितने लोग बैठते हैं, क्या कोई हिडन चार्ज का ज़िक्र है, और क्या कंपनी अपनी शर्तें साफ़-साफ़ बताती है या नहीं।

जैसे-जैसे डेज़र्ट सफारी की लोकप्रियता बढ़ी है, वैसे-वैसे यह सवाल भी ज़्यादा पूछा जाने लगा है कि कैसे हम इस अनुभव को ज़िम्मेदारी के साथ जियें। कई ऑपरेटर अब प्लास्टिक के उपयोग को घटाने, लाइट और तेज़ संगीत को सीमित रखने और मेहमानों को स्थानीय पर्यावरण और संस्कृति के बारे में बताने पर ध्यान दे रहे हैं।
दूसरी ओर, आज के यात्री भी सिर्फ़ ‘एक फोटो’ से ज़्यादा चाहते हैं – वे कहानी, संदर्भ और इंसानी जुड़ाव ढूँढते हैं। जब टूर कंपनी और यात्री दोनों इस दिशा में सोचते हैं, तो डेज़र्ट सफारी दुबई सिर्फ़ एक चेकलिस्ट-ऐक्टिविटी न रहकर एक गहरी याद बन सकती है।

डे-ट्रिप सफारी से भी आपको रेगिस्तान का अच्छा अनुभव मिल सकता है, लेकिन अगर आप रात वहीं ठहरने वाले ओवरनाइट पैकेज चुनते हैं, तो मामला और भी रोचक हो जाता है। जब दिन वाले टूर की बसें वापस चली जाती हैं, तो कैंप थोड़ा-थोड़ा शांत होता जाता है और अँधेरे के साथ सितारों की संख्या बढ़ने लगती है।
रेत पर बिछे बिस्तर या टेंट के अंदर लेटकर जब आप ऊपर देखते हैं, तो शहर में शायद ही कभी दिखने वाला साफ़ आसमान नज़र आता है। सुबह जब पहली किरणें टीलों के पीछे से झाँकती हैं और आपके हाथ में गर्म चाय या कॉफी का कप होता है, तो वो कुछ ही मिनट अक्सर पूरी सफारी के सबसे यादगार पल बन जाते हैं।

आज हम दुबई को ग्लोबल सिटी के रूप में देखते हैं – गगनचुंबी इमारतें, शॉपिंग मॉल, आर्टिफिशियल आइलैंड – लेकिन इसकी जड़ें उस रेगिस्तान में हैं जहाँ कभी काफ़िले रुकते, लोग एक-दूसरे के साथ पानी और भोजन साझा करते और मेहमान को अल्लाह की भेजी नेमत मानकर उसका स्वागत करते थे।
जब आप डेज़र्ट सफारी के लिए ज़िम्मेदार ऑपरेटर चुनते हैं, प्रकृति को नुकसान पहुँचाने वाले कामों से बचते हैं और वहाँ काम करने वाले लोगों के साथ सम्मान से पेश आते हैं, तो आप भी इस लंबी कहानी में अपना छोटा-सा सकारात्मक अध्याय जोड़ते हैं – और यही किसी भी अच्छी यात्रा की असली खूबसूरती है।